બુધવાર, 30 ઑક્ટોબર, 2019

विभिन्न संस्थाओं के संस्कृत ध्येय वाक्य

*एक एक कर पढें कि संस्कृत किस तरह भारत की नींव है* -
विभिन्न संस्थाओं के संस्कृत ध्येय वाक्य ---

●भारत सरकार👉 सत्यमेव जयते
●लोक सभा👉 धर्मचक्र प्रवर्तनाय
●उच्चतम न्यायालय👉 यतो धर्मस्ततो जयः
●आल इंडिया रेडियो👉 सर्वजन हिताय सर्वजनसुखाय 
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●दूरदर्शन👉 सत्यं शिवं सुन्दरम्
●गोवा राज्य👉 सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्।
●भारतीय जीवन बीमा निगम👉 योगक्षेमं वहाम्यहम्
●डाक तार विभाग👉 अहर्निशं सेवामहे
●श्रम मंत्रालय👉 श्रम एव जयते
●भारतीय सांख्यिकी संस्थान👉 भिन्नेष्वेकस्य दर्शनम्
●थल सेना👉 सेवा अस्माकं धर्मः
●वायु सेना👉 नभःस्पृशं दीप्तम्
●जल सेना👉 शं नो वरुणः
●मुंबई पुलिस👉 सद्रक्षणाय खलनिग्रहणाय
●हिंदी अकादमी👉 अहं राष्ट्री संगमनी वसूनाम्
●भारतीय राष्ट्रीय विज्ञानं अकादमी👉 हव्याभिर्भगः सवितुर्वरेण्यम्
●भारतीय प्रशासनिक सेवा अकादमी👉 योगः कर्मसु कौशलम्
●विश्वविद्यालय अनुदान आयोग👉 ज्ञान-विज्ञानं विमुक्तये
●नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन👉 गुरुर्गुरुतमो धाम
●गुरुकुल काङ्गडी विश्वविद्यालय👉 ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युमपाघ्नत
●इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय👉 ज्योतिर्व्रणीत तमसो विज्ञानन
●काशी हिन्दू विश्वविद्यालय:👉 विद्ययाऽमृतमश्नुते
●आन्ध्र विश्वविद्यालय👉 तेजस्विनावधीतमस्तु
●बंगाल अभियांत्रिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय,
शिवपुर👉 उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान् निबोधत
●गुजरात राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय👉 आनो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः
●संपूणानंद संस्कृत विश्वविद्यालय👉 श्रुतं मे गोपाय
●श्री वैंकटेश्वर विश्वविद्यालय👉 ज्ञानं सम्यग् वेक्षणम्
●कालीकट विश्वविद्यालय👉 निर्भय कर्मणा श्री
●दिल्ली विश्वविद्यालय👉 निष्ठा धृति: सत्यम्
●केरल विश्वविद्यालय👉 कर्मणि व्यज्यते प्रज्ञा
●राजस्थान विश्वविद्यालय👉 धर्मो विश्वस्य जगतः प्रतिष्ठा
●पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय👉
युक्तिहीने विचारे तु धर्महानि: प्रजायते
●वनस्थली विद्यापीठ👉 सा विद्या या विमुक्तये।
●राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्👉
विद्याsमृतमश्नुते।
●केन्द्रीय विद्यालय👉 तत् त्वं पूषन् अपावृणु
●केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड👉 असतो मा सद्गमय
प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, त्रिवेन्द्रम👉 कर्मज्यायो हि अकर्मण:
●देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर👉 धियो यो नः प्रचोदयात्
●गोविंद बल्लभ पंत अभियांत्रिकी महाविद्यालय, पौड़ी👉 तमसो मा ज्योतिर्गमय
●मदनमोहन मालवीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय गोरखपुर👉 योगः कर्मसु कौशलम्
●भारतीय प्रशासनिक कर्मचारी महाविद्यालय, हैदराबाद👉 संगच्छध्वं संवदध्वम्
●इंडिया विश्वविद्यालय का राष्ट्रीय विधि विद्यालय👉 धर्मो रक्षति रक्षितः
●संत स्टीफन महाविद्यालय, दिल्ली👉 सत्यमेव विजयते नानृतम्
●अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान👉 शरीरमाद्यं खलुधर्मसाधनम्
●विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, नागपुर👉 योग: कर्मसु कौशलम्
●मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान,इलाहाबाद👉 सिद्धिर्भवति कर्मजा
●बिरला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान, पिलानी👉 ज्ञानं परमं बलम्
●भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर👉 योगः कर्मसुकौशलम्
●भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई👉 ज्ञानं परमं ध्येयम्
●भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर👉 तमसो मा ज्योतिर्गमय
●भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई👉 सिद्धिर्भवति कर्मजा
●भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की👉 श्रमं विना नकिमपि साध्यम्
●भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद👉 विद्या विनियोगाद्विकास:
●भारतीय प्रबंधन संस्थान बंगलौर👉 तेजस्वि नावधीतमस्तु
●भारतीय प्रबंधन संस्थान कोझीकोड👉 योगः कर्मसु कौशलम्
●सेना ई एम ई कोर👉 कर्मह हि धर्मह
●सेना राजपूताना राजफल👉 वीर भोग्या वसुन्धरा
●सेना मेडिकल कोर👉 सर्वे संतु निरामया ..
●सेना शिक्षा कोर👉 विद्यैव बलम्
●सेना एयर डिफेन्स👉 आकाशेय शत्रुन् जहि
●सेना ग्रेनेडियर रेजिमेन्ट.👉 सर्वदा शक्तिशालिम्
●सेना राजपूत बटालियन👉 सर्वत्र विजये
●सेना डोगरा रेजिमेन्ट👉 कर्तव्यम् अन्वात्मा
●सेना गढवाल रायफल👉 युद्धया कृत निश्चयः
●सेना कुमायू रेजिमेन्ट👉 पराक्रमो विजयते
●सेना महार रेजिमेन्ट👉 यश सिद्धि?
●सेना जम्मू काश्मीर रायफल👉 प्रस्थ रणवीरता?
●सेना कश्मीर लाइट इंफैन्ट्री👉 बलिदानं वीर-लक्ष्यम्?
●सेना इंजीनियर रेजिमेन्ट👉 सर्वत्र
●भारतीय तट रक्षक-वयम् रक्षामः
●सैन्य विद्यालय👉 युद्धं प्रगायय?
●सैन्य अनुसंधान केंद्र👉 बलस्य मूलं विज्ञानम्
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मित्रों!
*सिलसिला यहिं खतम नहीं होता*,
विदेशी भी हमारे कायल हैं देखो जरा...
●नेपाल सरकार👉 जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी
●इंडोनेशिया-जलसेना 👉 जलेष्वेव जयामहे (इंडोनेशिया) -
पञ्चचित
●कोलंबो विश्वविद्यालय- (श्रीलंका)👉 बुद्धि: सर्वत्र भ्राजते
●मोराटुवा विश्वविद्यालय (श्रीलंका)👉 विद्यैव सर्वधनम्
पेरादे
 पञ्चचित
●पेरादेनिया विश्वविद्यालय👉 सर्वस्य लोचनशास्त्रम्
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*जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्*
भारत माता की जय⛳🚩🚩🙏

રવિવાર, 11 ઑગસ્ટ, 2019

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस में झंडा फहराने में क्या है अंतर ?

!!!एक रोचक तथ्य!!!

जानिए स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस में झंडा फहराने में क्या है अंतर ?

पहला अंतर

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडे को नीचे से रस्सी द्वारा खींच कर ऊपर ले जाया जाता है, फिर खोल कर फहराया जाता है, जिसे ध्वजारोहण कहा जाता है क्योंकि यह 15 अगस्त 1947 की ऐतिहासिक घटना  को सम्मान देने हेतु किया जाता है जब प्रधानमंत्री जी ने ऐसा किया था। संविधान में इसे अंग्रेजी में Flag Hoisting (ध्वजारोहण) कहा जाता है।

जबकि

26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडा ऊपर ही बंधा रहता है, जिसे खोल कर फहराया जाता है, संविधान में इसे Flag Unfurling (झंडा फहराना) कहा जाता है।
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दूसरा अंतर

15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री जो कि केंद्र सरकार के प्रमुख होते हैं वो ध्वजारोहण करते हैं, क्योंकि स्वतंत्रता के दिन भारत का संविधान लागू नहीं हुआ था और राष्ट्रपति जो कि राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख होते है, उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था। इस दिन शाम को राष्ट्रपति अपना सन्देश राष्ट्र के नाम देते हैं।

जबकि

26 जनवरी जो कि देश में संविधान लागू होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, इस दिन संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं
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तीसरा अंतर

स्वतंत्रता दिवस के दिन लाल किले से ध्वजारोहण किया जाता है।

जबकि

गणतंत्र दिवस के दिन  राजपथ  पर झंडा फहराया जाता है।

શનિવાર, 25 મે, 2019

Do we know actual full form of some words???

Do we know actual full form of some words??? 

News paper = North East West South past and present events report.

Chess = Chariot, Horse, Elephant, Soldiers.

Cold =Chronic Obstructive Lung Disease.

Joke =Joy of Kids Entertainment.

Aim =Ambition in Mind.

Date =Day and Time Evolution.

Eat =Energy and Taste.

Tea =Taste and Energy Admitted.

Pen =Power Enriched in Nib.

Smile =Sweet Memories in Lips Expression.

Bye =Be with you Everytime.

રવિવાર, 10 માર્ચ, 2019

ब्राह्मण समाज

ब्राह्मण निर्धन होगा तो बनेगा सुदामा फिर एकदिन कृष्ण उसकी सेवा करेँगे..

ब्राह्मण अपमानित होगा तो बनेगा चाणक्य,फिर एक दिन नये राज्य कि स्थापना कर देगा,,,
ब्राह्मण सटया जायेगा तो बनेगा परशुराम, फिर एक दिन पापीयो का विनाश कर देगा,

ब्राह्मण पढेगा तो आर्यभट्ट बन जायेगा,
फिर एक दिन पुरे विश्व को 0 (ZERO)दे जायेगा,
ब्राह्मण जब वेद धर्म का विनाश देखेगा,
तो आदि शँकराचार्य बन जायेगा फिर एक दिन वैदिक धर्म कि स्थापना कर देगा,

ब्राह्मण जब लोगो को बीमार देखेगा तो
चरक बन जायेगा, फिर एक दिन पुरे विश्व को आर्युवेद दे जायेगा,

ब्राह्मण ने हमेशा अपने ज्ञान के प्रकाश से विश्व को प्रकाशित किया है,
प्रणाम है ब्राह्मण समाज को. .
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नही हमारी.

ब्राह्मण धर्म - वेद
ब्राह्मण कर्म - गायत्री
ब्राह्मण जीवन - त्याग
ब्राह्मण मित्र - सुदामा
ब्राह्मण क्रोध - परशुराम
ब्राह्मण त्याग - ऋषि दधिची
ब्राह्मण राज - बाजीराव पेशवा
ब्राह्मण प्रतिज्ञा - चाणक्य
ब्राह्मण बलिदान - मंगल आजाद
ब्राह्मण भक्ति - रावण
ब्राह्मण ज्ञान - आदि गुरु शंकराचार्य
ब्राह्मण सुधारक - महर्षि दयानंद
ब्राह्मण राजनीतिज्ञ - कोटिल्य
ब्राह्मण विज्ञान - आर्यभट
ब्राह्मण गणितज्ञ - रामानुजम
ब्राह्मण खिलाड़ी - सचिन तेंदुलकर

कर्म से, धर्म से, दान से, ज्ञान से, विज्ञान से,
नाम से, जीवन से, मृत्यु से, भक्ति से, शक्ति से,
मुक्ति से, आत्मा से, परमात्मा से, मूल्यों से,
संस्कारो से, बल से, बुद्धि से, कौशल से, सम्मान से, विश्वास से ब्राह्मण बनना शुरू करिए तभी अपने पूर्वजो के किये गौरवशाली कार्यो पर आप गर्व कर पायगे...
"ब्राह्मण महिमा"
ब्राह्मण:- ब्रह्मा के मुख से उत्पन्न सर्वोच्च वर्ण ।
१ ब्राह्मण का जन्म: भगवान् विष्णु का अंश अवतार।
२ ब्राह्मण की विद्या: ज्ञान का अथाह सागर ।
३ ब्राह्मण की बुद्धि : समस्त समस्याओं का समाधान।
४ ब्राह्मण की वाणी : वेद का ज्ञान ।
५ ब्राह्मण की शिक्षा : जीवन जीने की कला ।
६ ब्राह्मण की दृष्टी ; सम्भाव।
७ ब्राह्मण की शिखा: संकल्पों का समूह ।
८ ब्राह्मण की दया : संकटों का हरण ।
९ ब्राह्मण की कृपा : भवसागर तरने का साधन ।
१० ब्राह्मण का कर्म : सर्व जन हिताय ।
११ ब्राह्मण का निवास : देवालय ।
१२ ब्राह्मण के दर्शन : सर्वमंगल ।
१३ ब्राह्मण का आशीर्वाद : समस्त सुखो की प्राप्ति ।
१४ ब्राह्मण की सेवा : परलोक सुधारना ।
१५ ब्राह्मण का वरदान: मोक्ष की प्राप्ति ।
१६ ब्राह्मण का अस्त्र : श्राप ।
१७ ब्राह्मण का शस्त्र : कलम ।
१८ ब्राह्मण को दान : सहस्त्रो पापो से मुक्ति ।
१९ ब्राह्मण को दक्षिणा : सात पीढ़ी का उद्धार।
२० ब्राह्मण की संतुष्ठी: सभी भयो से मुक्ति ।
२१ ब्राह्मण की हुँकार: राजा महाराजयों का चरणागत होना ।
२२ ब्राह्मण की गर्जना : सर्वभूतों का संहार ।
२३ ब्राह्मण का कोप : सर्वनाश ।
२४ सर्व ब्राह्मण की एकता : सर्व शक्तिमान।
जय महाकाल .....जय परशुराम ...

સોમવાર, 22 ઑક્ટોબર, 2018

संस्कृत : कुछ रोचक तथ्य....


संस्कृत के बारे में ये 20 तथ्य जान कर आपको भारतीय होने पर गर्व होगा।

आज हम आपको संस्कृत के बारे में कुछ ऐसे तथ्य बता रहे हैं,जो किसी भी भारतीय
का सर गर्व से ऊंचा कर देंगे;;

.1. संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी माना जाता है।

2. संस्कृत उत्तराखंड की आधिकारिक भाषा है।

3. अरब लोगो की दखलंदाजी से पहले संस्कृत भारत की राष्ट्रीय भाषा थी।

4. NASA के मुताबिक, संस्कृत धरती पर बोली जाने वाली सबसे स्पष्ट भाषा है।

5. संस्कृत में दुनिया की किसी भी भाषा से ज्यादा शब्द है। वर्तमान में संस्कृत के शब्दकोष में 102 अरब 78 करोड़ 50 लाख शब्द है।

6. संस्कृत किसी भी विषय के लिए एक अद्भुत खजाना है। जैसे हाथी के लिए ही संस्कृत में 100 से ज्यादा शब्द है।

7. NASA के पास संस्कृत में ताड़पत्रो पर लिखी 60,000 पांडुलिपियां है जिन पर नासा रिसर्च कर रहा है।

8. फ़ोबर्स मैगज़ीन ने जुलाई,1987 में संस्कृत को Computer Software के लिए सबसे बेहतर भाषा माना था।

9. किसी और भाषा के मुकाबले संस्कृत में सबसे कम शब्दो में वाक्य पूरा हो जाता है।

10. संस्कृत दुनिया की अकेली ऐसी भाषा है जिसे बोलने में जीभ की सभी मांसपेशियो का इस्तेमाल होता है।

11. अमेरिकन हिंदु युनिवर्सिटी के अनुसार संस्कृत में बात करने वाला मनुष्य बीपी,
मधुमेह,कोलेस्ट्रॉल आदि रोग से मुक्त हो जाएगा। संस्कृत में बात करने से मानव शरीरका तंत्रिका तंत्र सदा सक्रिय रहता है जिससे कि व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश (PositiveCharges) के साथ सक्रिय हो जाता है।

12. संस्कृत स्पीच थेरेपी में भी मददगार है यह एकाग्रता को बढ़ाती है।

13. कर्नाटक के मुत्तुर गांव के लोग केवल संस्कृत में ही बात करते है।

14. सुधर्मा संस्कृत का पहला अखबार था, जो 1970 में शुरू हुआ था। आज भी इसका ऑनलाइन संस्करण उपलब्ध है।

15. जर्मनी में बड़ी संख्या में संस्कृतभाषियो की मांग है। जर्मनी की 14 यूनिवर्सिटीज़ में संस्कृत पढ़ाई जाती है।

16. नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार जब वो अंतरिक्ष ट्रैवलर्स को मैसेज भेजते थे तो उनके वाक्य उलट हो जाते थे। इस वजह से मैसेज का अर्थ ही बदल जाता था।
उन्होंले कई भाषाओं का प्रयोग किया लेकिन हर बार यही समस्या आई।आखिर में उन्होंने संस्कृत में मैसेज भेजा क्योंकि संस्कृत के वाक्य उल्टे हो जाने पर भी अपना अर्थ नही बदलते हैं।
जैसे
अहम् विद्यालयं गच्छामि।
विद्यालयं  गच्छामि अहम्।
गच्छामिअहम् विद्यालयं ।
उक्त तीनो के अर्थ में कोई अंतर नहीं है।

17. आपको जानकर हैरानी होगी कि Computer द्वारा गणित के सवालो को
हल करने वाली विधि यानि Algorithms संस्कृत में बने है ना कि अंग्रेजी में।

18. नासा के वैज्ञानिको द्वारा बनाए जा रहे 6th और 7th जेनरेशन Super
Computers संस्कृतभाषा पर आधारित होंगे जो 2034 तक बनकर तैयार हो जाएंगे।

19. संस्कृत सीखने से दिमाग तेज हो जाता है और याद करने की शक्ति बढ़ जाती है।
इसलिए London और Ireland के कई स्कूलो में संस्कृत को Compulsory
Subject बना दिया है।

20. इस समय दुनिया के 17 से ज्यादा देशो की कम से कम एक University में तकनीकी शिक्षा के कोर्सेस में संस्कृत पढ़ाई जाती है।

संस्कृत के बारे में ये 20 तथ्य जान कर आपको भारतीय होने पर गर्व होगा।

શનિવાર, 15 સપ્ટેમ્બર, 2018

હિંદુ ધર્મમાં શંખ

હિંદુ ધર્મમાં શંખને વિજય, સમૃદ્ધિ, શુભ અને યશનું પ્રતીક માનવામાં આવે છે. અનેક દેવી દેવતાઓના ફોટોમાં શંખ જોવા મળે છે. ઉત્સવ, પૂજા, હવન, મંગલધ્વનિ, પ્રયાણ, આગમન, યુદ્ધ આરંભ, લગ્ન, રાજ્યાભિષેક જેવા ધાર્મિક કાર્યોમાં શંખ વગાડવામાં આવે છે.

શંખને લક્ષ્મીજીનો સહોદર અને વિષ્ણુનો પ્રિય માનવામાં આવે છે. એવું પણ કહેવામાં આવે છે કે જ્યાં શંખ હોય છે ત્યાં લક્ષ્મીનો વાસ હોય છે. શંખના આકાર, ધ્વનિ અને સુંદરતાથી તેની ગુણવતા નક્કી થાય છે. ચમકદાર, સુડોળ, સુંદર, સ્પષ્ટ અને મધુર ધ્વનિવાળા શંખને સર્વશ્રેષ્ઠ માનવામાં આવે છે.

શંખ તો ભગવાનના મંદિરોમાં પૂજા વખતે ફૂંકવામાં આવે છે જે ખૂબ જરૂરી છે. આ એક વિજ્યઘોષ છે, ઇશ્વરને પ્રસન્ન કરતો આ બ્રહ્મનાદ છે. આના ઘોષથી વાતાવરણ અને મનમાં રહેલી નકારાત્મક શક્તિ અને વૃત્તિ દૂર થાય છે. શંખ માંહેથી ઓમ નાદ નીકળે છે

દક્ષિણવર્તી શંખ જે પરિવારમાં સ્થાપિત હોય છે, ત્યાં ગરીબી આવતી નથી, શાંતિ અને સમૃદ્ધિનો વાસ થાય છે. શંખમાં શુદ્ધ જળ ભરી વસ્તુ, વ્યક્તિ, સ્થાન પર છંટકાવ કરવાથી દુર્ભાગ્ય, અભિશાપ, અભિચાર અને દુર્ગ્રહના પ્રભાવને નષ્ટ કરે છે.

શંખ મુખ્યત્વે ત્રણ પ્રકારના હોય છે – દક્ષિણાવર્તી, વામાવર્તી, મધ્યવર્તી.દક્ષિણાવર્તી શંખ જમણી બાજુ ખૂલે છે,વામાવર્તી શંખનું મુખ જમણી બાજુ હોય છે જ્યારે મધ્યવર્તી શંખનું મુખ વચ્ચે આવેલ હોય છે.મધ્યવર્તી શંખ મળવા દુર્લભ છે.

શંખમાં ભરી રાખેલા પાણીનું સેવન કરવાથી પણ અનેક લાભો પ્રાપ્ત થાય છે, જે શરીર માટે હિતકારી છે. વાસ્તુશાસ્ત્ર પ્રમાણે પણ શંખનું ઘરમાં હોવું ઘણું હિતકારી છે.શંખ ઘરમાં સુખ,શાંતિ અને સમૃદ્ધિ લાવે છે.વાસ્તુશાસ્ત્રના નિયમો શંખને પૂરી રીતે હકારાત્મક બતાવે છે.

કહેવાય છે કે,શંખને ઘરમાં રાખવાથી નકારાત્મક શક્તિઓ પાસે આવતી નથી.શંખનાદથી અનિષ્ટ શક્તિઓ દુર ભાગે છે. શંખનાદથી આસપાસની ભૂમિમાં એક પ્રકારની હકારાત્મક ઊર્જા ફેલાતી હોવાની માન્યતા છે.શંખના અવાજથી ભૂમિ જાગૃત બને છે,તેમાં હકારાત્મકતા-ઊર્જા અને જાગૃતિ પ્રવર્તે છે.

હિંદુ પૂજા સામગ્રીમાં શંખનો સમાવેશ થાય છે. ઘરે અને મંદિરમાં ભગવાનનાં દ્વાર ખોલતાં પહેલાં શંખ વગાડવામાં આવે છે. પૂજામાં રાખવામાં આવતા શંખ ઘણી વખત સોના કે ચાંદીથી મઢીને સુશોભિત કરવામાં આવે છે. ભગવાનનાં અભિષેકમાં પણ શંખ વપરાય છે. ફૂંકવા માટે ડાબો શંખ અને પુજા કે અભિષેક માટે જમણો શંખ વપરાય છે.

શંખ તો યુદ્ધમાં મહાભારતના વખતથી ફૂંકવામાં આવે છે આ એક અસુરોના નાશ વિશે એક આહ્વાન છે. રામાયણના યુદ્ધમાં પણ શંખ ફૂંકવામાં આવ્યો હતો તેવો ઉલ્લેખ છે. શંખ ધ્વનિ દેવોને અતિ પ્રિય છે માટે જ મંદિરોમાં ફૂંકવામાં આવે છે. તો માનવજાતને પણ તેના થકી વિવિધ લાભ પ્રાપ્ત થાય છે.

પુરાણોમાં અને ખાસ કરીને શ્રીમદ્ ભાગવતમાં યુદ્ધ દરમ્યાન શંખનો વાદ્ય તરીકે અને ઘોષણા કરવા માટે ઉપયોગ થયાનું વારંવાર વર્ણન જોવા મળે છે. હિંદુ દેવતા (ભગવાન) વિષ્ણુના ચતુર્ભુજ સ્વરૂપમાં શંખ તેમનાં એક હાથમાં વર્ણવવામાં આવે છે. મહાભારતનાં વિવિધ પાત્રોનાં શંખનાં જુદા જુદા નામોનું વર્ણન ભગવદ્ ગીતાનાં પહેલા અધ્યાયમાં જોવા મળે છે.

મહાભારતમાં પ્રાતઃકાળે શંખનાદ થાય તે સાથે યુદ્ધ શરુ થતું હતું અને સંધ્યાકાળે શંખનાદ થતાં જ યુદ્ધ વિરામ થતો હતો. મહાભારતના યુદ્ધની શરુઆતમાં ભીષ્મ પિતામહે ભયંકર શંખનાદ કર્યો હતો તેની સામે ભગવાન શ્રીકૃષ્ણે પાંચજન્ય નામનો શંખ ફૂંક્યો હતો.

શ્રીકૃષ્ણનો પાંચજન્ય શંખ બહુ ચમત્કારી તથા સમગ્ર સૃષ્ટિમાં વખણાતો હતો અને કદમાં પણ બહુ મોટો હતો એવું કહેવામાં આવે છે કે પાંચજન્ય શંખનો ધ્વનિ યુદ્ધ ભૂમિથી કેટલાય માઇલો સુધી સંભળાતો હતો. દરેક પાંડવ પાસે પોતાનો પ્રિય શંખ રહેતો હતો અને તેઓએ પોતાના શંખનું નામકરણ પણ કરેલ હતું, જેમ કે યુધિષ્ઠિરના શંખનું નામ અનંતવિજય, અર્જુનના શંખનું નામ દેવદત્ત, ભીમના શંખનું નામ પૌંડ્રક, નકુલના શંખનું નામ સુઘોષ તથા સહદેવના શંખનું નામ મણિપુષ્પક હતું.

આ તમામે સમયે સમયે પોતાના શંખો વગાડયા હતા. પ્રાચીન કાળમાં યુદ્ધ શરૂ થયા તે પહેલાં શંખનો ધ્વનિ (અવાજ) કરવામાં આવતો. જે યોદ્ધાનો શંખનાદ વધુ તેને સર્વ શક્તિશાળી માનવામાં આવતો હતો. ભગવાન વિષ્ણુ અને તેમની પત્ની લક્ષ્મીનાં ચાર આયુધોમાં શંખને સ્થાન મળવાનું કારણ કે તેનો મહિમા મોટો છે.

લક્ષ્મી નારાયણની પૂજા કરતી વખતે તેમના મહત્વના આયુધ શંખની પણ પૂજા કરવામાં આવે છે. આરતી કરતી વખતે શંખમાં પાણી ભરીને ભક્તો પર છાંટવામાં આવે છે. આ પવિત્ર જળ વડે વ્યક્તિ પવિત્ર થયેલો માનવામાં આવે છે. શાસ્ત્રોમાં શંખના જુદા જુદા પ્રકાર બતાવવામાં આવ્યા છે.

મહાભારતના યુદ્ધમાં દરેક સારથી પોતાનો શંખ રાખતા. પરંતુ આ બધામાં ભગવાન શ્રીકૃષ્ણ પાસે રહેલ પાંચજન્ય શંખ સર્વશ્રેષ્ઠ હતો. શુભ કાર્યની શરૂઆતમાં, ઘર પ્રવેશ વખતે શંખનો બ્રહ્માનાદ આસુરી તત્વોનો નકારાત્મક શક્તિઓ નાશ પામે છે. આનંદ ફેલાય છે તો વાસ્તુદોષનો નાશ થાય છે.

શંખનું વિધિસર પૂજન થાય તો દરિદ્રતા દૂર થાય છે. તેના અન્ય ચમત્કારિક ફાયદાઓ પણ છે. દેશ વિદેશના પ્રવાસમાં ‘જમણા’ શંખમાં ચોખા ભરીને સાથે રાખવાથી વિવિધ અડચણો દૂર થાય છે. વ્યાપાર ધંધા વ્યવસાયમાં પ્રગતિ થાય છે. રોગી પાસે આ જમણો શંખ ફૂંકવાથી તેનો રોગ દુર થાય છે.•

હિંદુ ધર્મમાં શંખ

હિંદુ ધર્મમાં શંખને વિજય, સમૃદ્ધિ, શુભ અને યશનું પ્રતીક માનવામાં આવે છે. અનેક દેવી દેવતાઓના ફોટોમાં શંખ જોવા મળે છે. ઉત્સવ, પૂજા, હવન, મંગલધ્વનિ, પ્રયાણ, આગમન, યુદ્ધ આરંભ, લગ્ન, રાજ્યાભિષેક જેવા ધાર્મિક કાર્યોમાં શંખ વગાડવામાં આવે છે.

શંખને લક્ષ્મીજીનો સહોદર અને વિષ્ણુનો પ્રિય માનવામાં આવે છે. એવું પણ કહેવામાં આવે છે કે જ્યાં શંખ હોય છે ત્યાં લક્ષ્મીનો વાસ હોય છે. શંખના આકાર, ધ્વનિ અને સુંદરતાથી તેની ગુણવતા નક્કી થાય છે. ચમકદાર, સુડોળ, સુંદર, સ્પષ્ટ અને મધુર ધ્વનિવાળા શંખને સર્વશ્રેષ્ઠ માનવામાં આવે છે.

શંખ તો ભગવાનના મંદિરોમાં પૂજા વખતે ફૂંકવામાં આવે છે જે ખૂબ જરૂરી છે. આ એક વિજ્યઘોષ છે, ઇશ્વરને પ્રસન્ન કરતો આ બ્રહ્મનાદ છે. આના ઘોષથી વાતાવરણ અને મનમાં રહેલી નકારાત્મક શક્તિ અને વૃત્તિ દૂર થાય છે. શંખ માંહેથી ઓમ નાદ નીકળે છે

દક્ષિણવર્તી શંખ જે પરિવારમાં સ્થાપિત હોય છે, ત્યાં ગરીબી આવતી નથી, શાંતિ અને સમૃદ્ધિનો વાસ થાય છે. શંખમાં શુદ્ધ જળ ભરી વસ્તુ, વ્યક્તિ, સ્થાન પર છંટકાવ કરવાથી દુર્ભાગ્ય, અભિશાપ, અભિચાર અને દુર્ગ્રહના પ્રભાવને નષ્ટ કરે છે.

શંખ મુખ્યત્વે ત્રણ પ્રકારના હોય છે – દક્ષિણાવર્તી, વામાવર્તી, મધ્યવર્તી.દક્ષિણાવર્તી શંખ જમણી બાજુ ખૂલે છે,વામાવર્તી શંખનું મુખ જમણી બાજુ હોય છે જ્યારે મધ્યવર્તી શંખનું મુખ વચ્ચે આવેલ હોય છે.મધ્યવર્તી શંખ મળવા દુર્લભ છે.

શંખમાં ભરી રાખેલા પાણીનું સેવન કરવાથી પણ અનેક લાભો પ્રાપ્ત થાય છે, જે શરીર માટે હિતકારી છે. વાસ્તુશાસ્ત્ર પ્રમાણે પણ શંખનું ઘરમાં હોવું ઘણું હિતકારી છે.શંખ ઘરમાં સુખ,શાંતિ અને સમૃદ્ધિ લાવે છે.વાસ્તુશાસ્ત્રના નિયમો શંખને પૂરી રીતે હકારાત્મક બતાવે છે.

કહેવાય છે કે,શંખને ઘરમાં રાખવાથી નકારાત્મક શક્તિઓ પાસે આવતી નથી.શંખનાદથી અનિષ્ટ શક્તિઓ દુર ભાગે છે. શંખનાદથી આસપાસની ભૂમિમાં એક પ્રકારની હકારાત્મક ઊર્જા ફેલાતી હોવાની માન્યતા છે.શંખના અવાજથી ભૂમિ જાગૃત બને છે,તેમાં હકારાત્મકતા-ઊર્જા અને જાગૃતિ પ્રવર્તે છે.

હિંદુ પૂજા સામગ્રીમાં શંખનો સમાવેશ થાય છે. ઘરે અને મંદિરમાં ભગવાનનાં દ્વાર ખોલતાં પહેલાં શંખ વગાડવામાં આવે છે. પૂજામાં રાખવામાં આવતા શંખ ઘણી વખત સોના કે ચાંદીથી મઢીને સુશોભિત કરવામાં આવે છે. ભગવાનનાં અભિષેકમાં પણ શંખ વપરાય છે. ફૂંકવા માટે ડાબો શંખ અને પુજા કે અભિષેક માટે જમણો શંખ વપરાય છે.

શંખ તો યુદ્ધમાં મહાભારતના વખતથી ફૂંકવામાં આવે છે આ એક અસુરોના નાશ વિશે એક આહ્વાન છે. રામાયણના યુદ્ધમાં પણ શંખ ફૂંકવામાં આવ્યો હતો તેવો ઉલ્લેખ છે. શંખ ધ્વનિ દેવોને અતિ પ્રિય છે માટે જ મંદિરોમાં ફૂંકવામાં આવે છે. તો માનવજાતને પણ તેના થકી વિવિધ લાભ પ્રાપ્ત થાય છે.

પુરાણોમાં અને ખાસ કરીને શ્રીમદ્ ભાગવતમાં યુદ્ધ દરમ્યાન શંખનો વાદ્ય તરીકે અને ઘોષણા કરવા માટે ઉપયોગ થયાનું વારંવાર વર્ણન જોવા મળે છે. હિંદુ દેવતા (ભગવાન) વિષ્ણુના ચતુર્ભુજ સ્વરૂપમાં શંખ તેમનાં એક હાથમાં વર્ણવવામાં આવે છે. મહાભારતનાં વિવિધ પાત્રોનાં શંખનાં જુદા જુદા નામોનું વર્ણન ભગવદ્ ગીતાનાં પહેલા અધ્યાયમાં જોવા મળે છે.

મહાભારતમાં પ્રાતઃકાળે શંખનાદ થાય તે સાથે યુદ્ધ શરુ થતું હતું અને સંધ્યાકાળે શંખનાદ થતાં જ યુદ્ધ વિરામ થતો હતો. મહાભારતના યુદ્ધની શરુઆતમાં ભીષ્મ પિતામહે ભયંકર શંખનાદ કર્યો હતો તેની સામે ભગવાન શ્રીકૃષ્ણે પાંચજન્ય નામનો શંખ ફૂંક્યો હતો.

શ્રીકૃષ્ણનો પાંચજન્ય શંખ બહુ ચમત્કારી તથા સમગ્ર સૃષ્ટિમાં વખણાતો હતો અને કદમાં પણ બહુ મોટો હતો એવું કહેવામાં આવે છે કે પાંચજન્ય શંખનો ધ્વનિ યુદ્ધ ભૂમિથી કેટલાય માઇલો સુધી સંભળાતો હતો. દરેક પાંડવ પાસે પોતાનો પ્રિય શંખ રહેતો હતો અને તેઓએ પોતાના શંખનું નામકરણ પણ કરેલ હતું, જેમ કે યુધિષ્ઠિરના શંખનું નામ અનંતવિજય, અર્જુનના શંખનું નામ દેવદત્ત, ભીમના શંખનું નામ પૌંડ્રક, નકુલના શંખનું નામ સુઘોષ તથા સહદેવના શંખનું નામ મણિપુષ્પક હતું.

આ તમામે સમયે સમયે પોતાના શંખો વગાડયા હતા. પ્રાચીન કાળમાં યુદ્ધ શરૂ થયા તે પહેલાં શંખનો ધ્વનિ (અવાજ) કરવામાં આવતો. જે યોદ્ધાનો શંખનાદ વધુ તેને સર્વ શક્તિશાળી માનવામાં આવતો હતો. ભગવાન વિષ્ણુ અને તેમની પત્ની લક્ષ્મીનાં ચાર આયુધોમાં શંખને સ્થાન મળવાનું કારણ કે તેનો મહિમા મોટો છે.

લક્ષ્મી નારાયણની પૂજા કરતી વખતે તેમના મહત્વના આયુધ શંખની પણ પૂજા કરવામાં આવે છે. આરતી કરતી વખતે શંખમાં પાણી ભરીને ભક્તો પર છાંટવામાં આવે છે. આ પવિત્ર જળ વડે વ્યક્તિ પવિત્ર થયેલો માનવામાં આવે છે. શાસ્ત્રોમાં શંખના જુદા જુદા પ્રકાર બતાવવામાં આવ્યા છે.

મહાભારતના યુદ્ધમાં દરેક સારથી પોતાનો શંખ રાખતા. પરંતુ આ બધામાં ભગવાન શ્રીકૃષ્ણ પાસે રહેલ પાંચજન્ય શંખ સર્વશ્રેષ્ઠ હતો. શુભ કાર્યની શરૂઆતમાં, ઘર પ્રવેશ વખતે શંખનો બ્રહ્માનાદ આસુરી તત્વોનો નકારાત્મક શક્તિઓ નાશ પામે છે. આનંદ ફેલાય છે તો વાસ્તુદોષનો નાશ થાય છે.

શંખનું વિધિસર પૂજન થાય તો દરિદ્રતા દૂર થાય છે. તેના અન્ય ચમત્કારિક ફાયદાઓ પણ છે. દેશ વિદેશના પ્રવાસમાં ‘જમણા’ શંખમાં ચોખા ભરીને સાથે રાખવાથી વિવિધ અડચણો દૂર થાય છે. વ્યાપાર ધંધા વ્યવસાયમાં પ્રગતિ થાય છે. રોગી પાસે આ જમણો શંખ ફૂંકવાથી તેનો રોગ દુર થાય છે.•